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Tuesday, May 27, 2014

भारतीय मौद्रिक नीति (Indian Monetary Policy) & पूँजी बाजार [Capital Martket]

भारतीय मौद्रिक नीति (Indian Monetary Policy)
भारतीय मौद्रिक नीति के दो स्पष्टï उद्देश्य निम्नलिखित हैं-
(
I) आर्थिक विकास को तेज करना; और 
(
II) मुद्रास्फीतिकारी दबावों को नियंत्रित करना 
भारतीय रिज़र्व बैंक मौद्रिक नीति को लागू करने की मुख्य एजेंसी है। भारतीय रिज़र्व बैंक  द्वारा स्थिर मौद्रिक नीति प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त किए उपायों में निम्नलिखित शामिल हैं-
बैंक दर
यह वो दर है जिस पर भारतीय रिज़र्व बैंक विनिमय के  बिलों पर दोबारा कमीशन लेता है व्यवहार्यत:, यह वह दर है जिस पर भारतीय रिज़र्व बैंक अन्य वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देता है। अत: यह मौद्रिक नीति अर्थव्यवस्था के एक संकेत के रूप में कार्य करती है।  
आरक्षित नकदी निधि अनुपात (सी आर आर)
प्रत्येक वाणिज्यिक बैंक को भारतीय रिज़र्व बैंक के पास (या तो नकदी अथवा बही शेष) अपनी माँग और आवधिक देयताओं (जमा) का कुछ प्रतिशत रखना अपेक्षित होता है। भारतीय रिज़र्व बैंक को 3 से 15 प्रतिशत के बीच सी आर आर निर्धारित करने का अधिकार है।  
सावधिक चलननिधि अनुपात (एस. एल. आर.)
वाणिज्य बैंकों द्वारा अपनी कुल माँग और आवधिक देयताओं (एन. डी. सी. एल.) का कुछ प्रतिशत (सी आर आर के अतिरिक्त) नकद, सोना और अनुमोदित प्रतिभूतियों की अवस्था में नकद (लिक्विड) परिसम्पत्तियों के रूप में रखना भी अपेक्षित होता है।  
भारतीय रिज़र्व बैंक
भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के  अंतर्गत 1 अप्रैल, 1935 को हुई थी और एक जनवरी, 1949 को इसका राष्टï्रीयकरण किया गया। रिज़र्व बैंक के उद्देश्य इस प्रकार हैं-बैंक नोट जारी करने का एकमात्र अधिकार, देश का विदेशी मुद्रा भंडार रखना, मुद्रा और ऋण प्रणाली का परिचालन करना ताकि देश में मुद्रा की स्थिरता बनी रहे और देश के आर्थिक व सामाजिक उद्देश्यों और नीतियों को ध्यान में रखते हुए देश के वित्तीय ढाँचे का सुदृढ़ तरीके से विकास करना। रिज़र्व बैंक भारत सरकार, राज्य सरकारों, वाणिज्यिक बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों और कुछ वित्तीय संस्थाओं के बैंकर के रूप में कार्य करती है।

 पूँजी  बाजार
रिजर्व बैंक
भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना 1 अप्रैल, 1935 में की गई थी। 1 जनवरी 1949 को इसका राष्ट्रीयकरण किया गया। देश में एक रुपये के सिक्कों और नोटों और छोटे सिक्कों को छोड़कर अन्य मुद्रा जारी करने का एक मात्र अधिकार रिजर्व बैंक को ही प्राप्त है। केंद्र सरकार के एजेंट के रूप में रिजर्व बैंक भारत सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले एक रुपये के नोटों, सिक्कों तथा छोटे सिक्कों के वितरण का कार्य करता है। रिजर्व बैंक केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के साथ किए गये अनुबंधों के अनुसार उनके बैंकर के रूप में कार्य करता है। रिजर्व बैंक केंद्र और राज्य सरकारों के उधारी कार्यक्रम का संचालन करता है। यह ऋण के समुचित उपभोग से मूल्यों में स्थिरता लाने के साथ-साथ उत्पादन बढ़ाने के लिए मुद्रा नीति तैयार करता है और उसे लागू करता है। रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में व्यवस्था बनाये रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत की सदस्यता के नाते सरकार के एजेंट के रूप में कार्य करता है। यह विकास और संवद्र्धन के विभिन्न कार्र्यों के अतिरिक्त वाणिज्यिक बैंकिंग व्यवस्था, शहरी सहकारी बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र का नियमन तथा निरीक्षण भी करता है।
रिजर्व बैंक के कार्र्यों का नियंत्रण केंद्रीय निदेशक मंडल के एक बोर्ड़ द्वारा किया जाता है। बोर्ड की नियुक्ति भारत सरकार द्वारा भारतीय बैंक अधिनियम के नियमों के अधीन की जाती है।

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