1)भारतीय बैंकिंग उद्योग पर भारतीयरिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा अक्टूबर, 2013 के दौरान जारी किए आंकड़े के अनुसार भारतीय बैंकों का वर्ष 2012-13 के दौरान प्रति कर्मचारी औसत व्यवसाय कितना था? –रु. 12.13 करोड़(RBI द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार भारत के सबसे बड़े बैंक – भारतीय स्टेट बैंक(SBI) का प्रति कर्मचारी औसत व्यवसाय मात्र 9.43 करोड़ रुपए था, जोकि कुल बैंकिंग औसत से काफी कम था)2)भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 25 सितम्बर, 2013 को उपभोक्ता उत्पादोंको खरीदने में सहूलियत देने वाली एकबहुत लोकप्रिय सुविधा पर प्रतिबन्धलगाने की घोषणा की। यह कौन सी सुविधा है? –उत्पादों को खरीदने के लिए आसान मासिक किश्तों पर 0% ब्याजकी सुविधा(उल्लेखनीय है कि RBI ने यह सुविधा प्रदान करने वाले बैंकों से इस सुविधा में छुपे खर्चों का ब्यौरा बताने को कहा था लेकिन ज़्यादातर बैंक इसे बताने में आनाकानी कर रहे थे। RBI का मानना हैकि बाजार में 0% ब्याज जैसी कोई चीज नहीं है तथा आदर्श बैंकिंग नीति यह अपेक्षा रखती है कि ऐसी योजना पर लिया जाना वाला प्रोसेसिंग चार्ज और ब्याज को एक समान दर पर रखा जाय। ऐसा न होने पर यह सुविधा ग्राहकों के शोषण का उपागम बनती हैं। इसके अलावा RBI ने यह भी कहा कि डेबिट कार्ड से खरीद करने पर ग्राहक से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा सकता है)3)भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 4 अक्टूबर, 2013 को पूर्व गवर्नर बिमल जालान के नेतृत्व में एक तीन-सदस्यीय समिति का गठन कर दिया जोकि नए बैंकिंग लाइसेंसों की जांच कर बैंक लाइसेंस प्रदान करने के लिएअपनी सिफारिश देगी। यह बैंकिंग लाइसेंस जनवरी, 2014 तक प्रदान किए जाने की संभावना है। इससमिति में शामिल तीन सदस्य कौन से हैं? –ऊषा थोराट(RBI की पूर्व उप-गवर्नर), सी.बी. भावे (SEBI के पूर्व अध्यक्ष) और नचिकेत मोर (वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञ) – यह समिति अपनी सिफारिशें RBI के गवर्नर तथा उप-गवर्नरों को भेजेगी जिस पर अंतिमनिर्णय RBI के केन्द्रीय बोर्ड में लिया जायेगा। उल्लेखनीय है कि नए बैंकिंग लाइसेंस के लिए 26 आवेदन आए हैं तथा इसमें भारत का सबसे बड़े औद्यौगिक समूह टाटा तथा अरबपति कारोबारी अनिल अम्बानी और कुमार मंगलम बिड़ला की कम्पनियों ने भी आवेदन किया है)4) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 30 सितम्बर, 2013 को “ए प्रोफाइल ऑफ बैंक्स : 2012-13″ (‘A Profile of Banks: 2012-13’) नामक एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें भारतीय बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े अन्य तथ्यों के अलावा इस क्षेत्र की शुद्ध गैर-निष्पादित सम्पत्तियों(net non-performing assets(NPA)) के बारे में आकड़े पेश किए गए। इन आंकड़ों में मुख्यत: क्या तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं?*.वित्तीय वर्ष 2012-13 की समाप्ति पर भारत केबैंकों की कुल शुद्ध गैर-निष्पादित सम्पत्तियाँ कुल प्रदत्त ऋणों का 1.68% था (वर्ष 2011-12 की समाप्ति पर यह आंकड़ा 1.28% था। उल्लेखनीय है कि शुद्ध गैर-निष्पादित सम्पत्तियों में वृद्धि इस बात का परिचायक है कि देश की आर्थिक गतिविधियों के हालात अच्छे नहीं हैं*.भारतीय स्टेट बैंक (SBI) समेत भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के 26 बैंकों की शुद्ध गैर-निष्पादित सम्पत्तियों में 2.02% की वृद्धि दर्ज की गई है जबकि पिछले साल यह वृद्धि 1.53% थी*.भारतीय स्टेट बैंक तथा उसके पांच सहयोगी बैंकों की शुद्ध गैर-निष्पादित सम्पत्तियों में पिछले साल के 1.76% के मुकाबले 2012-13 के दौरान 2.02% की वृद्धि हुई है*.देश के नए निजी वैंकों की शुद्ध गैर-निष्पादित सम्पत्तियों में पिछले साल के 0.42% के मुकाबले 2012-13 के दौरान 0.45% की मामूली वृद्धि हुई है5)भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 30 सितम्बर, 2013 को चालू वित्त वर्ष (2013-14) की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान देश के चालू खाते के घाटे (CAD – current account deficit) से सम्बन्धित आंकड़े जारी किए। इस समयावधि के दौरान देशका चालू खाते का घाटा कितना रहा? – 21.8 अरब डालर (चालू खाते का घाटा किसी देश में विदेशी मुद्रा की प्राप्ति और इसके खर्च के बीच का अंतर होता है जब प्राप्तियों से अधिक खर्च होता है)चालू खाते के खाते से सम्बन्धित अन्य तथ्य जो RBI ने जारी किए -*.चालू खाते का घाटा आलोच्य अवधि के दौरान देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 4.9% था (उल्लेखनीय है कि पिछले वित्तीय वर्ष की इसी तिमाही के दौरान चालू खाते का घाटा 16.9 अरब डालर था और यहसकल घरेलू उत्पाद का 4.4% था)*.स्वर्ण आयात में वृद्धि और कच्चे तेल का लगातार बढ़ने वाला आयात चालूखाते को घाटे को बढ़ाने वाले मुख्य तत्व थे। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में स्वर्ण आयात में 7.3 अरब डालर की वृद्धि हुई और अगर इस वृद्धि को हटा दिया जाय तो यह घाटा मात्र 14.5 अरब डालर रह जाता है जोकि सकल घरेलू उत्पाद का मात्र 3.2% रह जाता है*.चालू खाते का घाटा जनवरी-मार्च 2013 की तिमाही के दौरान सकल घरेलू उत्पाद का 3.6% रह गया जबकि अक्टूबर-दिसम्बर2012 की तिमाही के दौरान यह सकल घरेलू उत्पाद का सर्वाधिक यानि 6.5% था*.केन्द्र सरकार ने चालू खाते के घाटे को वर्ष 2013-14 के दौरान 70 अरब डालर के स्तर पर लाने की योजना बनाई है, जिससे यह सकल घरेलू उत्पाद का 3.7% रह जायेगा (वर्ष 2012-13 के दौरान यह घाटा 88.2 अरब डालर के साथ सकल घरेलू उत्पाद के 4.8% तक पहुँच गया था6)सार्वजनिक क्षेत्र के किस बैंक ने अगस्त, 2013 से अपनी गैर-निष्पादित परिसम्पत्तियों (NPAs) की वसूली प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से ‘ओन योर एनपीए’ (‘Own your NPA’) नामक एक प्रयास शुरू किया है जिसमें बैंक के मैनेजर्स कोसबसे बड़े 20 कर्जदारोंसे वसूली करने पर जोर दिया जा रहा है? –IDBI बैंक(उल्लेखनीय है कि इस प्रयास के अंतर्गत प्रत्येक जोन, रीजन तथा ब्रांच के मैनेजर स्वयं ग्राहकों (कर्जदारों) से जाकर मिलेंगे तथा वसूली करने का मार्ग खोजेंगे। IDBI बैंक ने कुल 1,522 मामलों को चिन्हितकिया है जिनकी बैंक को कुल देनदारी 5,805 करोड़ रुपए है। वसूली का यह अभियान 31 दिसम्बर, 2013 को समाप्त हो जायेगा)7)सार्वजनिक क्षेत्र के किस बैंक ने पिछले एक वर्ष में पूरे देश के बाजारों में 2,000 कैश डिपाज़िट मशीन्स (Cash Deposit Machines – CDMs) को लगाया है जो ग्राहकों को दिन के चौबीसों घण्टे पैसे जमा करने की सुविधा प्रदान करती हैं –भारतीय स्टेट बैंक – SBI(SBI ने देश की वित्तीय व्यवस्था में तरलता बढ़ाने के उद्देश्य से यहकदम उठाया है। इसके अंतर्गत देश केबाजारों में कैश डिपाज़िट मशीन्स लगाई गईं हैं जिसमें व्यापारी, दुकानदार तथा सब्जी विक्रेता जैसे लोग किसी भी समय अपनी नकदी जमा कर सकते हैं। यह मशीन उन लोगों को मुख्यत: ध्यान में रखकर बनाई गई है जो बैंक की शाखाएं बन्द होने के चलते नकदी अपने पास ही रखने को मजबूर होते हैं। पैसा जमा करने के लिए SBI एटीएम-कम-डेबिट-कार्ड का इस्तेमाल करना होता है तथापैसा होने के साथ ही इसकी रसीद तुरन्त मिल जाती है। SBI की एक ऐसी मशीन दिनमें औसत चार लाख रुपए की नकदी प्राप्त कर रही है)8)भारत के पूँजी बाजार नियामक SEBI ने 12 सितम्बर, 2013 को विदेशी निवेशकों के लिए KYC नियमों में थोड़ी ढील देते हुए नए दिशानिर्देश जारी किए। इस नए दिशानिर्देश में विदेशी निवेशकोंको कितनी श्रेणियों में बाँटा गया है? –तीन श्रेणी(उल्लेखनीय है कि नए दिशानिर्देशों कम जोखिम वाले विदेशी निवेशकों के लिए पंजीकरण और खुलासे से सम्बन्धित हैं। इसमें पहली श्रेणी के विदेशी निवेशकों में सरकारी तथा सम्बन्धित विदेशी निवेशक शामिल किए गए हैं जैसे विदेशों के केन्द्रीय बैंक, सरकारी विभाग व एजेंसियां, सावरिन फण्ड्स, इत्यादि। दूसरी श्रेणी के विदेशी निवेशकों में विविधिकृत व विनियामित फण्ड जैसे की म्यूचुअल फण्ड्स, निवेश/पुनर्निवेश फण्ड्स व निवेश ट्रस्ट्स को शामिल किया गया है। तीसरी श्रेणी के विदेशी निवेशकों में चैरिटेबल ट्रस्ट्स, सोसाइटीज़, कार्पोरेट संस्थाएं, परिवार, आदि शामिल किए गए हैं जो PISमार्ग से निवेश नहीं करते हैं)9)1 अक्टूबर, 2013 से भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC of India) की जीवन बीमा पालिसियां महंगी हो गईं क्योंकि इसी दिन से LIC पर बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDA) का एक दिशानिर्देश लागू हो गया। यह दिशानिर्देश क्या है? –IRDA के इस दिशानिर्देश के अनुसार LIC को 1 अक्टूबर, 2013 से अपने सभी गैर-यूनिटलिंक्डउत्पादों पर 3% सेवा-कर ग्राहकों से वसूलना होगा(उल्लेखनीय है कि जहाँ निजी जीवन बीमा कम्पनियां अपनी बेची गई पालिसियों पर सेवा-कर ग्राहकों से वसूलती रही हैं वहीं LIC ने अपनी मनी-बैक और इन्डोमैण्ट पालिसियों पर यह कर लागू नहीं किया था तथा इसेवह अलग से वसूलती नहीं थी। IRDA ने कुछ समय पहले जारी अपने दिशानिर्देश में LIC को निर्देश दिया था को वह प्रीमियम राशि में सेवा-कर को अलग से शामिल करे। LIC भारत की सबसे बड़ी जीवन बीमा कम्पनीहै जिसका लगभग 83% जीवन बीमा बाजारपर कब्जा है)10)किस अर्थशास्त्री को 26 सितम्बर,2013 को पांचवां डोइश बैंक प्राइज़ फार फाइनेंशियल इकोनामिक्स (5th Deutsche Bank Prize for Financial Economics 2013) प्रदान किया गया? –डा. रघुराम राजन, भारतीयरिज़र्व बैंक के गवर्नर (यह अकादमिकपुरस्कार डोइश बैंक दान कोष द्वारा प्रायोजित है तथा सेंटर फार फाइनेंशियल स्टडीज प्रत्येक दो वर्ष में इसे फ्रैंकफर्ट स्थित गोएथ विश्वविद्यालय (Goethe University) के साथ भागीदारी में प्रदान करता है। इसके अंतर्गत 50,000 यूरो प्रदान किए जाते हैं। उल्लेखनीय है कि डा. राजन ने वर्ष 2005 में ही तीन साल बाद आने वाले वित्तीय संकट की चेतावनी दे दी थी।उन्हें विश्व के चोटी के विश्वविद्यालयोंसे आए 260 से अधिक नामांकनों में से इस पुरस्कार के लिए चुना गया)
Friday, January 3, 2014
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